बुंदेलखंड की नारी शक्ति: सागर की महिलाओं ने सिलाई मशीन से लिखी आत्मनिर्भरता की नई इबारत, हर महीने कमा रही हैं ₹12,000 तक


सागर
। बुंदेलखंड की वह धरा, जहाँ कभी सामाजिक रूढ़ियों के कारण महिलाओं का घर की चारदीवारी से बाहर निकलना भी दुर्लभ माना जाता था, आज राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (MPSRLM) के तहत एक ऐतिहासिक बदलाव की गवाह बन रही है। सागर जिले में 'वेदिका संकुल स्तरीय संगठन' के बैनर तले एकजुट हुई ग्रामीण महिलाओं ने अपनी लगन, हुनर और अटूट हौसले के दम पर न केवल अपनी किस्मत बदली है, बल्कि पूरे अंचल के लिए स्वावलंबन की एक नई राह दिखाई है।

इस प्रेरणादायक सफर की शुरुआत तब हुई जब वेदिका संकुल स्तरीय संगठन,जिससे 60 स्व-सहायता समूहों की सैकड़ों महिलाएं जुड़ी हैं—की सदस्यों ने गुना जिले का दौरा किया। वहां एक सफल सिलाई सेंटर को संचालित होते देख इन महिलाओं की आंखों में भी आत्मनिर्भर बनने का सपना जागा। उन्होंने ठान लिया कि यह बदलाव वे अपने गांव और जिले में भी लाकर रहेंगी।

इनके इस संकल्प को पंख दिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने। महिलाओं को आर-सेटी (RSETI - ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) के माध्यम से आधुनिक सिलाई-कढ़ाई का पेशेवर प्रशिक्षण दिलाया गया, जिससे उनके पारंपरिक हुनर को एक व्यावसायिक निखार मिला।

साल 2023 में स्थापित इस सिलाई सेंटर ने अपनी यात्रा शासकीय स्कूलों की यूनिफॉर्म (स्कूली ड्रेस) सिलने के आर्डर से शुरू की थी। महिलाओं की बेहतरीन कारीगरी, गुणवत्ता और समय पर काम पूरा करने की प्रतिबद्धता ने जल्द ही बाजार में उनकी साख मजबूत कर दी।

आज महिलाएं बाजार की मांग के अनुरूप नवीनतम पैटर्न तथा डिजाइन के वस्त्र तैयार कर लेती है इनके सिलाई सेंटर में अत्याधुनिक ऑटोमैटिक मशीन है जो इनके काम को आसान ओर गुणवत्ता पूर्ण बनाती है इनके यहां से सिले हुए कपड़े न केवल भारत बल्कि विदेशों तक भेजे जाते है इस सिलाई सेंटर को सागर सहित आसपास के जिलों के व्यापारियों से काम मिलने लगा है।

आज स्थिति यह है कि यह सेंटर निजी क्षेत्र के बड़े व्यापारियों और बाज़ारों से सीधे थोक ऑर्डर प्राप्त कर रहा है और सफलतापूर्वक उनकी आपूर्ति कर रहा है।

वर्तमान में इस सेंटर से जुड़ी 60 से अधिक महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। अपनी मेहनत, समय और कार्यकुशलता के अनुसार प्रत्येक महिला हर महीने ₹5,000 से लेकर ₹12,000 तक की सीधी आय अर्जित कर रही है। महिलाओं ने अपनी अपनी कहानी साझा की महिलाएं कहती है कि ...सिलाई सेंटर से जुड़ने और प्रशिक्षण मिलने के बाद हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। पहले घर से निकलना भी आसान नहीं था और हम छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते थे। आज हम आत्मनिर्भर हैं, अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे पा रही हैं और परिवार का मुख्य आर्थिक सहारा बनी हैं। आजीविका मिशन ने हमें सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि सम्मान से जीने की राह दिखाई है।

सामाजिक बंधनों को तोड़कर बनीं प्रेरणा की मिसाल

आजीविका मिशन और वेदिका संकुल स्तरीय संगठन का यह साझा प्रयास केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड में सदियों से चली आ रही सामाजिक सीमाओं पर एक करारी चोट है। कभी घर के चौके-बर्तन तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज एक सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक ने बताया कि जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर तथा स्वावलंबी बनाने में शासन के ग्रामीण आजीविका मिशन की बड़ी भूमिका है 

सागर जिले की यह पहल साबित करती है कि अगर महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे हर चुनौती को पार कर आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण का नया इतिहास रच सकती हैं।

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