विवि : भारतीयता के स्पंदन की प्रतीक है हिंदी - प्रो. राजेंद्र यादव


सागर
। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर के हिंदी विभाग द्वारा आचार्य नन्ददुलारे वाजपई सभागार में व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर प्रो. राजेंद्र यादव उपस्थित रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में विज्ञापन की दुनिया में हिंदी की समृद्धि, स्वाधीनता आन्दोलन में हिंदी की भूमिका, गणेश शंकर विद्यार्थी का हिंदी भाषा के क्षेत्र में योगदान एवं मानवीय दृष्टिकोण के साथ हिंदी की विकास यात्रा पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि बाज़ारवाद के दौर में हिंदी के समक्ष कई समस्याएं उत्पन्न हुई हैं, समाज की साहित्य से दूरी बढ़ी है। इन सबके बावजूद हिंदी, भारतीयता के स्पंदन की प्रतीक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. चंदा बेन ने की। उन्होंने अपने वक्तव्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति में हिंदी भाषा के संवर्द्धन हेतु किये गए प्रावधानों पर अपनी बात रखी।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. हिमांशु कबीर ने हिंदी की वैश्विक मजबूत स्थिति एवं राष्ट्रीय अस्मिता की भावना के संरक्षण में हिंदी की भूमिका पर अपनी बात रखी। डॉ. अफ़रोज़ बेग़म ने हिंदी की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। डॉ अवधेश कुमार ने हिंदी भाषा के विकास क्रम को श्रोताओं के मध्य साझा किया। इनके साथ ही स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों में रजनीश, सपना, रमन, आदित्य, ललित पाल, नीरज आदि ने अपने विचार साझा किए। शोधार्थियों में सुरेन्द्र, सूर्यकान्त, प्रतिभा, तनु, अंकित आदि ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन दुर्गेश कुमार सजल द्वारा किया गया। संजय कुमार श्यामले ने आभार माना। इस दौरान  शोधार्थी - नेहा, रामधीरज, हरिशंकर, गब्बर सिंह, अनुराग, काजल, हिमांक, शुभांगी एवं स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों सहित अन्य विभागों के शोधार्थी विद्यार्थी भारी संख्या में उपस्थित रहे।

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