सागर। पत्रकारिता की असली ताकत केवल घटनाओं को दर्ज करने में नहीं, बल्कि उन सवालों को सामने लाने में है जिन्हें समाज अक्सर अनदेखा कर देता है। एक पत्रकार को घटनाओं के पीछे छिपे सच तक पहुंचने के लिए सवाल पूछने, तथ्यों की पड़ताल करने और जमीन पर जाकर लोगों की आवाज सुनने का साहस रखना चाहिए। इन्हीं विचारों और अनुभवों के साथ विभाग के पूर्व छात्र एवं स्वतंत्र पत्रकार सतीश कुमार ने डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के संचार एवं पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों से संवाद किया। इस संवाद में डीन डॉ. बलवंत सिंह भदोरिया, डॉ. अलीम अहमद खान, डॉ. विवेक जायसवाल सहित विभाग के तमाम विद्यार्थीयों और शोधार्थियों सहित स्टाफ की मौजूदगी रही। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. हरीसिंह गौर के चित्र पर माल्यार्पण एवं सरस्वती पूजन के साथ हुई। छात्र आशुतोष ने अतिथि परिचय दिया।
छात्र संवाद कार्यक्रम में सतीश कुमार ने पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान अपने संघर्ष से लेकर स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जमीनी रिपोर्टिंग तक की यात्रा विद्यार्थियों के साथ साझा की। उन्होंने बताया कि पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान सामने आई चुनौतियों और आर्थिक-सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पत्रकारिता को केवल रोजगार के रूप में नहीं, बल्कि समाज को समझने और उसकी आवाज को सामने लाने के माध्यम के रूप में चुना। उन्होंने बताया कि पत्रकारिता के क्षेत्र में शुरुआती संघर्षों के बाद स्वतंत्र पत्रकारिता ने उन्हें अलग-अलग सामाजिक और जमीनी मुद्दों पर काम करने का अवसर दिया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों, वंचित समुदायों, श्रमिकों, किसानों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को करीब से समझने और रिपोर्ट करने के अनुभव साझा किए।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की शुरुआत किसी बड़े संस्थान या बड़े शहर से ही हो, यह जरूरी नहीं है। एक पत्रकार अपने आसपास मौजूद सवालों से भी बेहतर पत्रकारिता की शुरुआत कर सकता है। स्थानीय समस्या को गहराई से समझना और उसके पीछे छिपे व्यापक सामाजिक संदर्भ को सामने लाना ही पत्रकारिता को महत्वपूर्ण बनाता है। उन्होंने विशेष रूप से खोजी पत्रकारिता, रिपोर्टिंग और जमीनी पत्रकारिता पर विद्यार्थियों का ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि खोजी पत्रकारिता केवल किसी दस्तावेज को हासिल कर लेने या कोई सनसनीखेज तथ्य सामने लाने का नाम नहीं है। इसके लिए लंबे समय तक शोध, दस्तावेजों की पड़ताल, स्रोतों से बातचीत और तथ्यों का स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले पत्रकार को स्वयं से कई सवाल पूछने चाहिए- घटना क्यों हुई, इसके पीछे कौन से कारण हैं, इससे किस पर असर पड़ रहा है और क्या इस कहानी का कोई ऐसा पक्ष है जो अब तक सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील विषयों पर रिपोर्टिंग करते समय पत्रकार को पीड़ित परिवार की गरिमा और संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने दिल्ली में पत्रकारिता के दौरान मिले अनुभवों को भी विद्यार्थियों के साथ साझा किया। उन्होंने कथित हफ्ता वसूली जैसे मामलों की रिपोर्टिंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जमीनी रिपोर्टिंग में पत्रकार को कई बार ऐसे लोगों और परिस्थितियों के बीच जाना पड़ता है जहां खबर जुटाना आसान नहीं होता। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे केवल बड़ी खबरों के पीछे न भागें, बल्कि अपने आसपास के छोटे-छोटे बदलावों को भी देखें। किसी गांव में पानी की समस्या, किसी मजदूर की बदलती जिंदगी, किसी किसान की फसल, किसी महिला की सामाजिक स्थिति या किसी बच्चे की शिक्षा - इनमें से हर विषय एक बड़ी कहानी का आधार बन सकता है।
विशिष्ट अतिथि डीन प्रो. बलवंत सिंह भदौरिया ने इस अवसर पर कहा कि, एआई के युग में पत्रकारिता एक चुनौती पूर्ण कार्य है। साथ में उन्होंने गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे महान पत्रकारों का उदाहरण देते हुए पत्रकारिता के विद्यार्थियों को मार्गदर्शित किया। आने वाले समय में एक सच्चे पत्रकार बनने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
डॉ. विवेक जायसवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि मेरे छात्रों में अब तक इतने कम समय में ऊंचाई तक पहुंचने वाले छात्र के रूप में मैं सतीश को देखता हूं। उन्होंने कहा कि, सतीश ने कैसे एक छोटे से न्यूज़पेपर से लिखना शुरू किया जिसको कोई जानता नहीं था और विभिन्न तरह की विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने अपनी पत्रकारिता की राह को छोड़ा नहीं और आगे चलकर उन्होंने समाज के मुद्दों को राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. अलीम अहमद खान अपने विचार साझा करते हुए कहते हैं कि विद्यार्थियों को अपने प्रति और अपने उद्देश्य की प्रति स्पष्टता ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए, चाहे कितनी भी विषम परिस्थितियों आ जाएं। पत्रकारिता समाज सेवा का एक सशक्त माध्यम है। आज के दौर में युवाओं का पत्रकारिता की ओर आना समाज को एक अच्छी राह देना है। मेरी कामनाएं है कि, विद्यार्थी सीखें, समझें और प्रैक्टिस करें ताकि, समाज के जिस दर्द को दबाया जा रहा है उसे गंभीरता से समाने लाया जा सके।
मंच संचालन शोधार्थी श्याम सिंह यादव ने किया।

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