करने वाली नगर की सक्रिय संस्था श्यामलम के प्रतिष्ठित कार्यक्रम "साहित्य परिक्रमा के नवम सोपान में चर्चित लेखक आर के तिवारी की साहित्यिक साधना पर शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय सागर में चर्चा हुई। विदित हो कि साहित्य परिक्रमा उन्ही रचनाकारों पर आयोजित किया जाता है जिनकी कम से कम 5 कृतियों का प्रकाशन हुआ हो। इस आयोजन में तिवारी की 11वीं पुस्तक "कौन लगती है वह आपकी" का विमोचन भी हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन, दीप प्रज्जवलन व हिन्दी साहित्य सृजन संघ की अध्यक्ष श्रीमती सुनीला सराफ द्वारा की गई
सरस्वती वंदना से हुआ।
कवि नलिन निर्मल जैन ने अतिथियों के स्वागत पश्चात आयोजक संस्था श्यामलम के अध्यक्ष उमा कान्त मिश्र ने संस्था का परिचय देते हुए संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
श्यामलम महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष
डॉ. अंजना चतुर्वेदी तिवारी प्राध्यापक ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि यह जीवन की उपलब्धता का उत्सव है।
अतिथियों और श्यामलम द्वारा पुस्तक विमोचित किए जाने के पश्चात लेखक आर के तिवारी का सम्मान शाल श्रीफल अभिनंदन पत्र के साथ किया गया। शहर की विभिन्न संस्थाओं व सभागार में उपस्थित प्रबुद्धजन द्वारा भी सम्मान किया गया।
सम्मानित साहित्यकार आर के तिवारी ने लेखकीय वक़्तव्य में कहा कि मैंने समाज में जो देखा और जो सीखा उसे साहित्य के माध्यम से लौटाने का प्रयास कर रहा हूं। श्यामलम् संस्था और उसके अध्यक्ष मेरे प्रेरणा स्रोत हैं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि संस्कृतिविद
डॉ.कविता शुक्ला ने कहा कि तिवारी का रचनाकर्म सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हुआ है। उनकी भाषा और भाव बहुत सरल है एवं समाज के सभी वर्गों के लिए समझ में आने वाला है। बुद्धि एवं विवेक ही समाज को दिशा प्रदान करता है गहन अध्ययन ज्ञान को विवेक में परिवर्तित करता है।
सारस्वत अतिथि गर्ल्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी ने कहा तिवारी जी की शैली बहुत सहज है, बैंक कर्मी होते हुए जिन संबंधों को देखा समझा उन्हीं को अपने रचना धर्म में उतारा है। उन्होंने कालिदास और तुलसीदास की रचनाओं और जीवन अनुभवों का उदाहरण देते हुए कहा व्यक्ति अत्यधिक पाने की लालसा में अपने जीवन की सहायता को खो देता है।
विशेष आमंत्रित अतिथि ख्यात लेखिका
डॉ (सुश्री) शरद सिंह ने कथाकार आर.के. तिवारी के साहित्यिक अवदान के संबंध में कहा कि तिवारी जी ने बैंकिंग जीवन से सेवानिवृत होने के बाद बतौर साहित्यकार शब्दों के निवेश में अपनी उल्लेखनीय पहचान बनाई है। उनकी रचनाओं में गहरा सामाजिक सरोकार उपस्थित रहता है।
विशिष्ट अतिथि ईएमएमआरसी के प्रोड्यूसर माधव चंद्र के समीक्षा आलेख का वाचन अभिनंदन दीक्षित ने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एकता समिति,सागर के संरक्षक रशीद भाई ने कहा ऐसे आयोजन समाज में सौहार्द भाव के लिए बहुत आवश्यक हैं जो समाज के सभी वर्गों और मेरे जैसे व्यापारियों को भी जोड़ने का प्रयास करते हैं।
नगर के वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक सरस्वती वाचनालय सागर के सचिव शुकदेव प्रसाद तिवारी की गरिमामय उपस्थिति और उनके प्रेरणादायक आशीर्वचन ने सभागार में उपस्थित श्रोताओं को आल्हादित कर दिया। राहतगढ़ से पधारे सी एल कौशिक ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का व्यवस्थित व सुंदर संचालन डॉ .हरिसिंह गौर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ.सर्वेश्वर उपाध्याय ने किया। आभार कवि मुकेश तिवारी ने माना। अंत में श्यामलम कोषाध्यक्ष हरि शुक्ला की धर्म पत्नी श्रीमती लता शुक्ला के निधन पर उनकी स्मृति में 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
आयोजन में मिली बुंदेली सांस्कृतिक परंपरा की झलक
आयोजन में तिवारी जी के समधी कौशिक जी राहतगढ़ से पधारे, उनके आते ही आर के तिवारी की पत्नी श्रीमती कमला जी जो मंच पर बैठी थीं,उठकर दीवार की तरफ मुंह करके घूंघट डालकर खड़ी हो गईं। सम्मान और आदर की इस बुंदेली परंपरा को देख सभागार में उपस्थित श्रोताओं ने मुग्ध होकर करतल ध्वनि से श्रीमती तिवारी का अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में उपस्थित रहे
एल एन चौरसिया, डॉ श्याम मनोहर सीरोठिया, श्रवण कुमार श्रीवास्तव, शिवरतन यादव, राघवेंद्र नायक, अंबिका प्रसाद यादव, टी आर त्रिपाठी, हरिसिंह ठाकुर, रमाकांत मिश्रा, श्रीमती कमला तिवारी, डॉ लक्ष्मी पाण्डेय आचार्य, डॉ नीलिमा पिम्पलापुरे, ऊषा बर्मन, अर्चना प्यासी, संगीता चौबे, वर्षा तिवारी, शिल्पी शाह, डॉ नम्रता फुस्केले, हर्षिता सिंह, जे एल राठौर, डॉ अनिल जैन, रमेश दुबे, कवि आदर्श दुबे, आर सी चौकसे, संतोष श्रीवास्तव विद्यार्थी, सुरेंद्र शुक्ला, सौरभ दुबे, डॉ अभय सिंह, पवन रजक, एड.अमित तिवारी, कमलचंद जैन, राजेंद्र सोनी, एम शरीफ , नवाब फारुख भाई , अरुण दुबे, आशीष ज्योतिषी, डॉ नरेंद्र प्यासी, उमाशंकर रावत, दामोदर अग्निहोत्री,चंपक भाई, प्रभात कटारे, अमित चौबे, जगदीश लारिया, पैट्रिक फ़ुस्केले. के एल तिवारी, डॉ अतुल श्रीवास्तव, मनोज तिवारी, मुकेश सोनी, राजेंद्र सोनी, शरद जैन गुड्डू, देवेन्द्र सिंघई सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों व तिवारी जी के परिजनों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

एक टिप्पणी भेजें