सागर। जब मैं यहां भगवान श्री राधा कृष्ण जी के दर्शन कर रहा था तब सोच रहा था कि क्या मैं वृंदावन में हूं! रुद्राक्ष धाम पवित्र भक्तिमय भूमि बन गई है। यहां 39 करोड़ रुद्री अभिषेक हुए हैं। यहां आकर ऊर्जा और विश्वास से भर जाते हैं। यह भूमि अच्छा सोचने को मजबूर कर देती है। यह उद्गार परमपूज्य श्री रविशंकर जी महाराज रावतपुरा सरकार ने रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में आयोजित केशवम् बैंड के भजन क्लबिंग कार्यक्रम का शुभारंभ करने के पश्चात अपने उद्बोधन में व्यक्त किए। परमपूज्य श्री रविशंकर जी रावतपुरा सरकार ने कहा कि भूपेंद्र भैया अच्छे काम करते हैं। मां नर्मदा और भगवान से प्रार्थना है कि वे उन्हें ऐसे ही श्रेष्ठ कार्यों की प्रेरणा देते रहें। जैसे भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को चुना था, ऐसे ही एक अर्जुन यहां हमारे बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण शर्मा के रूप में बैठे हैं जिन्होंने प्रभु श्री रामलीला के मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। हिंदू धर्म के साथ जन्मों जन्मों तक उनके भी योगदान का स्मरण किया जाएगा। अशोक जी त्यागी, तपस्वी और सरल हृदय हैं।
श्री रविशंकर जी महाराज ने कहा कि अविराज जी ने यहां जीवन में सरलता, नम्रता के महत्व को रेखांकित किया। उनका चिंतन अच्छा है, वे जहां भी रहेंगे प्रकाश कर देंगे। गीता में कहा गया है जो निष्काम कर्म करता है उसे फल मांगना नहीं पड़ता। धीरे, विश्वास, संयम, सरलता, नम्रता जिसमें हों वही निष्काम कर्म को प्रवृत्त होता है। आज वातावरण यह है कि मनुष्य कर्म के साथ ही फल चाहता है। गीता कहती है कि आप कर्म करिए तब आपका भाग्य और मजबूत हो जाता है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का जैसा मंदिर रुद्राक्ष धाम में है वैसा उत्तर भारत में कहीं नहीं है। यहां दद्दा जी की कृपा है। जो यहां भक्ति में भीगता है उसे संसार की आग नहीं पकड़ पाती। कमल कीचड़ से ऊपर आता है। बुराई से अच्छाई की ओर बढ़ना यहां होता है। हमारी दृष्टि, विचार,सोच ऊंची होना चाहिए। अच्छे लोगों के साथ से यह मिलता है।
पूज्य श्री रविशंकर जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति श्रवण से बदलता है। मंदिर जाने से हृदय परिवर्तन होता है। हमारे भीतर के मोह माया अहंकार तीर्थ करने से नष्ट होते हैं। उन्होंने कहा कि आज का युग झूठ पर आधारित हो गया है। सत्य अंधेरे में छिपा जाता है। जोर से अतिउत्साह में बोल कर झूठ को सत्य बताने के प्रयास होते हैं। पर अंततः जैसी करनी वैसी भरनी होती है। कर्म और पुरुषार्थ से मुट्ठी भरी होना चाहिए। दान देने से सभी का हृदय परिवर्तन नहीं होता, परमार्थ आता है। गुप्त दान की बड़ी कीमत है। दिखावा, यश, प्रतिष्ठा के लिए दान दिया जाना ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव, दुख-सुख आते हैं। सुख में बौराए नहीं दुख में भयभीत न हों। उन्होंने कहा कि आज की भजन संध्या का भरपूर आनंद लें, भक्तिभाव में डूबें। यह आनंद आपको बदल देगा।
स्वागत भाषण में युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन केवल भक्ति और आध्यात्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें ज्ञान, कर्म, न्याय, साहस, नेतृत्व और सामाजिक एकता का व्यापक संदेश निहित है। ब्रह्म संहिता में श्रीकृष्ण को परम सत्य और सच्चिदानंद स्वरूप बताया गया है, वहीं भगवान शिव द्वारा भी वासुदेव श्रीकृष्ण के नाम और स्वरूप के निरंतर ध्यान का उल्लेख मिलता है। आदि शंकराचार्य के “भज गोविन्दम्” का संदेश भी मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर ईश्वर के स्मरण की प्रेरणा देता है। श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से यह सिखाया कि धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, कर्तव्य और मानव कल्याण के लिए खड़े होने का नाम है। गोवर्धन पर्वत धारण करने का प्रसंग भी यही संदेश देता है कि जब समाज संगठित होकर चुनौती का सामना करता है, तो बड़ी से बड़ी कठिनाई को पार किया जा सकता है। पर्वत श्रीकृष्ण की उंगली पर था, लेकिन उसके नीचे पूरा ब्रज समाज एकजुट होकर खड़ा था। आज की युवा पीढ़ी को श्रीकृष्ण के इसी संदेश से प्रेरणा लेकर जीवन की चुनौतियों का आत्मविश्वास और एकजुटता के साथ सामना करना चाहिए।
अविराज सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश आज के समय में इसलिए भी प्रासंगिक है, क्योंकि उन्होंने व्यक्ति को परिस्थितियों से भागने के बजाय अपने धर्म और कर्तव्य के अनुसार कर्म करने की प्रेरणा दी। महाभारत के प्रसंगों में श्रीकृष्ण ने स्पष्ट किया कि जहां मतभेद होते हैं, वहां बड़ी से बड़ी शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है, जबकि एकजुटता सफलता का आधार बनती है। कौरवों के पास विशाल सेना और अनेक बड़े योद्धा थे, लेकिन आपसी मतभेदों और गलत निर्णयों के कारण वे अपनी शक्ति का प्रभावी उपयोग नहीं कर सके। श्रीकृष्ण ने यह भी सिखाया कि सफलता मिलने पर मनुष्य को अहंकार से बचना चाहिए, क्योंकि किसी भी उपलब्धि के पीछे व्यक्तिगत प्रयास के साथ परिस्थितियों, सहयोग और ईश्वरीय कृपा का भी योगदान होता है। अर्जुन के रथ का प्रसंग भी इसी सत्य को सामने लाता है। उन्होंने कहा कि आज जब युवा तनाव, असफलता और जीवन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तब श्रीकृष्ण का निष्काम कर्म का संदेश उन्हें निराशा से बाहर निकलकर अपने कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा देता है। जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व नहीं, बल्कि उनके विचारों, कर्मयोग और धर्म, न्याय तथा मानव कल्याण के संदेश को जीवन में उतारने का अवसर भी है।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य श्री रविशंकर जी महाराज रावतपुरा सरकार ने दीपप्जलन के साथ किया। इसके पूर्व उन्होंने श्री राधाकृष्ण जी मंदिर में दर्शन किए। मंच पर पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने श्री रावतपुरा सरकार, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण शर्मा और केशवगिरि जी महाराज का पुष्प मालाओं से स्वागत किया। भजन क्लबिंग कर रहे केशवम् के आर्टिस्ट लोबीश शीतल तथा प्रगतिशर्मा का पुष्प गुच्छ से स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मण सिंह लोधी ने किया। जन्माष्टमी महोत्सव मनाने हजारों श्रद्धालु रुद्राक्ष धाम पहुंचे। सभी ने दर्शन किए, में संध्या का आनंद लिया और प्रसादी ग्रहण की।
केशवम् बेंड ने युवा श्रद्धालुओं को आकर्षित किया
दिल्ली से रुद्राक्ष धाम प्रस्तुति देने आए केशवम् बेंड के युवा कलाकारों ने अपने भजनों से मथुरा, वृंदावन, बरसाने की आध्यात्मिक भजन यात्रा करा दी। सैकड़ों युवा केशवम बेंड के साथ नाच रहे थे, हजारों झूम रहे थे। उन्होंने गणेश वंदना से आरंभ किया। तत्पश्चात शिव कैलाशों के वासी, अच्युतम् केशवम् कृष्ण दामोदरम राम नारायणम् जानकी वल्लभम्, कौन कहते हैं भगवान आते नहीं, श्यामा आन बसो वृंदावन में मेरी उमर बीत गई गोकुल में, गोविंद गोविंद गोविंद राधे,बृज रज की ,मने कारो कारो यमुना जी को पानी लागे जैसे सभी लोकप्रिय भजन गिटार, वायलिन, बांसुरी, इलेक्ट्रानिक की बोर्ड और ड्रम के साथ गाए।
ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर सांसद श्रीमती लता वानखेड़े, बंडा विधायक वीरेन्द्र सिंह लोधी, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, भाजपा जिलाध्यक्ष रानी कुशवाहा, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण शर्मा, महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह, पूर्व विधायक श्रीमती पारुल साहू केसरवानी, किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री कप्तान सिंह यादव, पूर्व मंत्री नारायण कबीर पंथी,नगर निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार, शहडोल संभाग प्रभारी पूर्व जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया, जाहर सिंह ,पूर्व महापौर अभय दरे, डाॅ. सुशील तिवारी, श्रीमती संध्या भार्गव, श्रीमती तृप्ति सिंह लोधी, जिला पंचायत सदस्य सरवजीत सिंह लोधी, जिला उपाध्यक्ष पुष्पेन्द्र परिहार मालथौन, एमआई सी सदस्य शैलेंद्र ठाकुर, राजकुमार पटेल, शैलेष जैन, सोमेश जड़िया, पार्षद रूबी कृष्ण कुमार पटेल,संजू घोसी, संतोष रोहित, अनुराग प्यासी, लक्ष्मण सिंह, वीरेंद्र बहादुर सिंह, एड.श्वेता यादव, पृथ्वी सिंह, क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष लखन सिंह, खुरई नपा. उपध्यक्ष राहुल चैधरी, रामकुमार बघेल मालथौन, नीतिराज पटेल, राजकुमारसिंह सुमरेड़ी, एड. गोविंद सिंह कर्रापुर, शैलेष केशरवानी, पार्षद बलराम यादव, मनोज राय, महेश साहू, जगन्नाथ गुरैया, विक्रम सोनी, मनीष चैवे, सूर्याश तिवारी, अंशुल परिहार, निकेश गुप्ता, यश अग्रवाल, अजीत सिंह चील पहाड़ी, वीनू शमशेर जंग बहादुर राणा, देवेंद्र सिंह केसली, राजा करैया, विजय पटेल, रिशांक तिवारी, मनीष मिश्रा, अभिषेक गौर, मीरा शर्मा, पप्पू गुप्ता, संतोष दुबे, नवीन भट्ट, अजय तिवारी देवलचैरी, रविन्द्र सिंह गौर, कमलेश राय, डाॅ. मदन केशरवानी, उमेश यादव, समर्थ दीक्षित, प्रतीक चैकसे, शुभम घोसी, आकाश सिंह गोदना, मनोज शुक्ला, डॉ. लक्ष्मी ठाकुर, राकेश चैबे, आशीष दुबे, अंकित विश्वकर्मा, पर्व तिवारी, सचिन शर्मा, राजवीर सिंह, रविन्द्र सिंह बरोदिया, पुष्पेन्द्र सिंह राजपूत मालथौन, अखिलेष पाठक, राजीव सोनी, शरद जैन, अंकित पांडे, राजू तिवारी, सचिन साहू, राजकुमार अहिरवार गढ़ौली, अजय लम्बरदार, अंश चैकसे, राजेंद्र यादव कल्लू, बलराम सिंह बरोदिया, संतोष तिवारी बमोरी हुड्डा, पप्पू मुकद्दम बांदरी, राजकमल केशरवानी सहित अनेक गणमान्य जन और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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